मन्नतों का ऐतिहासिक पर्व ‘बारगुनिया मेलादा’ सम्पन्न, अंगारों पर चलकर श्रद्धालुओं ने निभाई आस्था…

मन्नतों का ऐतिहासिक पर्व ‘बारगुनिया मेलादा’ सम्पन्न, अंगारों पर चलकर श्रद्धालुओं ने निभाई आस्था…

सेंधवा/बड़वानी || दि.08 मार्च 2026 || (समीर शेख)-: आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, गहरी आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक ऐतिहासिक ‘बारगुनिया मेलादा’ इस वर्ष भी पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।

मध्यप्रदेश के इस अंतिम और महत्वपूर्ण पारंपरिक मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहाँ आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। मन्नतधारी श्रद्धालुओं ने नंगे पैर दहकते अंगारों (चूल) पर चलकर अपनी मन्नत पूरी की और देवी-देवताओं के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की।
परंपरा के अनुसार, जो श्रद्धालु पूरे संयम और नियमों का पालन करते हैं, वे चूल पर चलकर अपनी मन्नत पूरी करते हैं।

इस अनूठी धार्मिक परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचे।
मेले में सिरपुर, तोरणमाल, खंडवा और खरगोन सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से आदिवासी समाज के युवा, युवतियां और बुजुर्ग शामिल हुए। लगभग डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा बारगुनिया क्षेत्र आदिवासी लोक संस्कृति के रंग में रंग गया।

राहुल सोलंकी के नेतृत्व में गूंजे ढोल-मांदल मेले के मुख्य आकर्षणों में मध्य प्रदेश विकास परिषद युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष राहुल सोलंकी अपनी टीम के साथ विशेष रूप से शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने समाज के युवाओं के साथ पारंपरिक ढोल और मांदल की थाप पर नृत्य कर उत्साह बढ़ाया। मेले में 51 ढोल-मांदल की गूंज ने वातावरण को और भी जीवंत और भव्य बना दिया।
समाजजनों के साथ साझा की खुशियां इस अवसर पर राहुल सोलंकी ने मेले में उपस्थित समाजजनों से आत्मीय मुलाकात कर एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर खुशियां साझा कीं। उन्होंने सभी क्षेत्रवासियों को मेलादे की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि “हमारी संस्कृति और परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं, जिन्हें सहेजना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।”

मेले में पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा, आभूषण और सांस्कृतिक वाद्य यंत्रों के साथ समाज की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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