योगी सरकार की कार्रवाई पर जलगांव माइनॉरिटी एजुकेशनल फेडरेशन ने जताई चिंता, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
जलगांव || ता. 21 जुलाई 2026 || (विठ्ठल भालेराव)-: जलगांव डिस्ट्रिक्ट माइनॉरिटी एजुकेशनल फेडरेशन (JDMF) ने उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक समाज के धार्मिक स्थलों एवं शैक्षणिक संस्थानों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए जिला अधिकारी जलगांव के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
फेडरेशन द्वारा सौंपे गए निवेदन में कहा गया कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने के लिए दिए गए नोटिस का मामला केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हजारों विद्यार्थियों के भविष्य और उनके शिक्षा के अधिकार से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। संगठन ने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो कानून के अनुसार निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन शिक्षा व्यवस्था और संविधान की मूल भावना को नुकसान पहुंचाने वाली कोई भी कार्रवाई उचित नहीं है।
फेडरेशन ने लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया। साथ ही आंदोलन कर रहे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। छात्रों और युवाओं की आवाज को बल प्रयोग से दबाने के बजाय संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए।
ज्ञापन में राष्ट्रपति से मांग की गई कि संविधान, शिक्षा के अधिकार, लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के समान शासन की रक्षा सुनिश्चित की जाए तथा देश के प्रत्येक नागरिक के साथ बिना किसी भेदभाव के न्याय किया जाए।

इस अवसर पर फेडरेशन पदाधिकारियों ने कहा कि “शिक्षा पर हमला नहीं चलेगा और लोकतंत्र में लाठी नहीं चलेगी।”
ज्ञापन सौंपने के दौरान JDMF अध्यक्ष जनाब ए. करीम सालार, पूर्व नगरसेवक रियाज बागवान, कुर्बान मेंबर, अयाज अली, खालिद बाबा, रफीक शेख, शाहिद पटेल, अमजद पठान, युसूफ खान, राजिक पटेल, अनवर सिकलकर, जमाल शेख, मुश्ताक सालार, जमील शेख, इरफान शेख, इरफान सालार सहित बड़ी संख्या में फेडरेशन के सदस्य उपस्थित थे।
