ई-बस से मंत्री परिषद बैठक में पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, दिया सादगी और संसाधन बचत का संदेश…
बड़वानी || 19 जुलाई 2026 || मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को सुशासन, मितव्ययिता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मंत्री परिषद की बैठक में शामिल होने के लिए मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इलेक्ट्रिक बसों से जगदीशपुर पहुंचकर एक नई मिसाल पेश की।
मुख्यमंत्री ने अपने शासकीय वाहन और सुरक्षा काफिले को मुख्यमंत्री निवास पर ही छोड़ दिया तथा मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ सामूहिक रूप से ई-बस से बैठक स्थल के लिए रवाना हुए।
मुख्यमंत्री निवास से सुबह 10 बजे तीन इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से मंत्रीगण और उनका स्टाफ जगदीशपुर के लिए रवाना हुआ। इस दौरान मंत्रियों के निजी वाहन, पायलट और फॉलो वाहन जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग नहीं किया गया। मुख्यमंत्री की इस पहल को शासन में सादगी, ईंधन बचत और शासकीय संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मंत्रिपरिषद की बैठक में शामिल होने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने वाहनों को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में छोड़कर ई-बसों के माध्यम से सामूहिक यात्रा की। इससे मुख्यमंत्री की उस सोच को बल मिला, जिसमें शासन के प्रत्येक स्तर पर अनावश्यक खर्चों में कमी और संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की ई-बस यात्रा को लेकर राजधानी सहित मार्ग में लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। पातरा पुल, लांबाखेड़ा तथा जगदीशपुर में विभिन्न स्थानों पर उनका पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। जगदीशपुर पहुंचने पर स्थानीय विधायक विष्णु खत्री ने अंगवस्त्र भेंट कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया, वहीं पारंपरिक तिलक लगाकर उनका अभिनंदन भी किया गया।
जगदीशपुर दुर्ग पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने धरोहर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया और प्रदर्शित कलाकृतियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने जनजातीय कलाकारों से संवाद कर उनकी कला और संस्कृति की जानकारी प्राप्त की। प्रदर्शनी में प्रदेश के जनजातीय नायकों, राष्ट्रभक्तों, सुशासन और शौर्य के प्रतीक शासकों के चित्रों को प्रदर्शित किया गया, जिसने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
मुख्यमंत्री की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत का संदेश देती है, बल्कि शासन-प्रशासन में सादगी और जवाबदेही को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम के रूप में भी देखी जा रही है।
