विश्व आदिवासी दिवस पर सेंधवा में उमड़ा आदिवासी समाज का जनसैलाब….
विधायक मोंटू सोलंकी के नेतृत्व में निकली भव्य रैली, जल-जंगल-जमीन, शिक्षा, रोजगार और अधिकारों के मुद्दे गूंजे
सेंधवा /बडवाणी || ता. 09 2026 || {समीर शेख} -: अगस्त संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सेंधवा में आदिवासी समाज की ओर से भव्य कार्यक्रम एवं विशाल रैली का आयोजन किया गया। सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी एवं आयोजन समिति के नेतृत्व में हजारों की संख्या में आदिवासी समाजजन, युवा, महिलाएं, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता रैली में शामिल हुए। विशाल जनसमूह ने आदिवासी समाज की एकजुटता, संगठन शक्ति और सामाजिक चेतना का प्रभावी प्रदर्शन किया।

रैली में आदिवासी समाज की पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मांदल और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान जल-जंगल-जमीन, शिक्षा, रोजगार, वन अधिकार, महिला सशक्तिकरण एवं आदिवासी समाज के हक-अधिकारों को लेकर जोरदार नारे लगाए गए।
बिरसा मुंडा और खाज्या नायक को किया नमन
कार्यक्रम में शामिल होने से पहले विधायक मोंटू सोलंकी चाचरिया पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके बाद मडगांव (चाचरिया फाटे) स्थित भगवान खाज्या नायक की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके पश्चात विधायक सोलंकी हजारों समाजजनों एवं कार्यकर्ताओं के साथ भव्य काफिले के रूप में सेंधवा के कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए।
रास्ते में विभिन्न स्थानों पर समाजजनों द्वारा रैली का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। युवाओं और महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने रैली को और भव्य बना दिया।
पारंपरिक विधि-विधान से कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद आदिवासी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके बाद आदिवासी महापुरुषों के छायाचित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया। कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न वक्ताओं ने सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक मुद्दों पर अपने विचार रखे।
9 अगस्त केवल उत्सव नहीं, इतिहास और अधिकारों को याद करने का दिन : मोंटू सोलंकी
विधायक मोंटू सोलंकी ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 9 अगस्त केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के इतिहास, संस्कृति, संघर्ष और अधिकारों को याद करने का दिन है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी महापुरुषों ने जल, जंगल, जमीन और समाज के सम्मान के लिए संघर्ष किया। आज जरूरत है कि नई पीढ़ी उनके संघर्ष और विचारों को आगे बढ़ाए। समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा, भाषा, जल-जंगल-जमीन और सामाजिक एकता से है।
उन्होंने कहा कि संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए समाज को शिक्षा, रोजगार, राजनीति और आर्थिक क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा। नई पीढ़ी को शिक्षित, जागरूक और संगठित करना ही समाज के विकास का सबसे बड़ा संकल्प होना चाहिए।
युवा शक्ति बनी रैली की सबसे बड़ी ताकत
विधायक सोलंकी ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस की रैली और कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत समाज के युवा रहे। युवाओं ने पिछले कई दिनों से लगातार मेहनत कर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने युवाओं से सामाजिक मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक क्षेत्र में भी अपनी भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को शासन-प्रशासन और विधानसभा तक मजबूती से पहुंचाने के लिए समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व जरूरी है।
महिला सशक्तिकरण के बिना समाज का विकास संभव नहीं : राजकला मोंटू सोलंकी
जिला पंचायत सदस्य राजकला मोंटू सोलंकी ने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला खेत में काम करे, घर संभाले या परिवार के लिए भोजन बनाए, उसका योगदान समाज और परिवार के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने तथा महिलाओं की राजनीतिक एवं सामाजिक भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।
जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए जागरूकता जरूरी : मुकेश मामा
मुकेश मामा ने कहा कि आदिवासी समाज लंबे समय से जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष करता आया है। उन्होंने समाज के शिक्षित युवाओं से जागरूक होकर समाज के अधिकारों की आवाज मजबूती से उठाने का आह्वान किया।
दहेज प्रथा के खिलाफ सामूहिक पहल की जरूरत
सुमलीबाई ने दहेज प्रथा को समाज के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि सामाजिक बुराइयों को दूर करना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव समाप्त करने की जरूरत है। उन्होंने दहेज प्रथा को रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर कमेटी बनाकर सामूहिक निर्णय लेने की बात कही।
दुरसिंग पटेल ने भी दहेज की बढ़ती मांग पर रोक लगाने के लिए समाज के स्तर पर ठोस और सामूहिक निर्णय लेने का आह्वान किया।
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की मांग : राजू पटेल
जयस कार्यकारी अध्यक्ष राजू पटेल ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने जल जीवन मिशन सहित विभिन्न योजनाओं में अनियमितताओं की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय या अत्याचार होने पर समाज को एकजुट होकर उसके साथ खड़ा होना चाहिए। साथ ही बेरोजगार युवाओं के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
मजदूरों के शोषण और पलायन पर चिंता : राहुल सोलंकी
जयस ब्लॉक अध्यक्ष एवं आदिवासी विकास परिषद युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष राहुल सोलंकी ने मजदूरों के पलायन और शोषण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रोजगार के अभाव में मजदूरों को बाहर जाना पड़ता है, जहां कई बार ठेकेदारों और बिचौलियों के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने समाज की नई पीढ़ी को शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से मजबूत बनाने का आह्वान किया।
संस्कृति और पहचान की रक्षा का आह्वान
अनिल सस्त्या ने आदिवासी संस्कृति, भाषा, परंपरा और सामाजिक पहचान को बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने का आह्वान किया।
वहीं विधायक प्रतिनिधि सुनील सोलंकी ने युवाओं से नौकरी के साथ-साथ व्यापार, व्यवसाय और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से मजबूत समाज ही अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा हो सकता है।
कार्यक्रम में देवा जाधव सहित अन्य वक्ताओं ने भी सामाजिक, राजनीतिक एवं जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित
कार्यक्रम का संचालन विजय सोलंकी ने किया। इस अवसर पर विवेक मेहता, कलम अवाया, कानसिंग कनोजे, जितेंद्र डावर, प्रताप सेंगर (सरपंच प्रतिनिधि), सरदार नरगावे सहित बड़ी संख्या में समाजजन, युवा, महिलाएं एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, वन अधिकार, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष तथा आदिवासी संस्कृति एवं पहचान की रक्षा के लिए समाज को एकजुट और जागरूक रहने का संदेश दिया।
विश्व आदिवासी दिवस पर समाज का संकल्प
कार्यक्रम में समाजजनों ने संकल्प लिया कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और पहचान की रक्षा करेंगे, जल-जंगल-जमीन एवं संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहेंगे, समाज की बेटियों और युवाओं को आगे बढ़ाएंगे तथा शिक्षा, संगठन और संघर्ष के माध्यम से आदिवासी समाज को मजबूत बनाएंगे।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर विधायक मोंटू सोलंकी की ओर से समस्त आदिवासी समाज को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं…
