सेंधवा/बड़वानी || दि. 03 एप्रिल 2026 || (समीर शेख)-: फौलादी इरादों से चमका वासवी का बेटा: महेश सापले ने ‘खेलो इंडिया ट्राइब गेम्स’ में देश के टॉप-10 धावकों में बनाई जगह, सुविधाओं के अभाव में भी जारी है संघर्ष कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक पातीं। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है ग्राम पंचायत वासवी के होनहार एथलीट महेश सापले ने। सीमित संसाधनों और सुविधाओं के अभाव के बावजूद महेश ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर हाल ही में छत्तीसगढ़ के जगदलपुर (बस्तर) में आयोजित प्रतिष्ठित ‘खेलो इंडिया ट्राइब गेम्स’ (30 मार्च से 2 अप्रैल 2026) में शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर के शीर्ष धावकों के बीच टॉप-10 में स्थान हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है।

यह उपलब्धि न केवल महेश के व्यक्तिगत संघर्ष और समर्पण का परिणाम है, बल्कि यह पूरे बड़वानी जिले और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। आज महेश की सफलता की चर्चा गांव-गांव में हो रही है और हर कोई उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है।
जिला अध्यक्ष राहुल सोलंकी ने दी बधाई, सुविधाओं की कमी पर जताई चिंता मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद (युवा प्रभाग) के जिला अध्यक्ष राहुल सोलंकी ने महेश सापले की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि महेश जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी हमारे समाज और क्षेत्र की असली पहचान हैं, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इस खिलाड़ी के पास आज भी अभ्यास के लिए उचित खेल मैदान तक उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा,
“महेश आज भी गांव की सड़कों पर दौड़कर अपनी प्रैक्टिस करते हैं। अगर उन्हें बेहतर सुविधाएं, कोचिंग और संसाधन मिलें, तो वे निश्चित ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं।”
संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायक सफर
महेश सापले का सफर आसान नहीं रहा। आर्थिक कठिनाइयों और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा।
सबसे पहले उन्होंने भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 1500 मीटर दौड़ में दूसरा स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
इसके बाद उनका चयन राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ, जहां झारखंड के रांची में आयोजित प्रतियोगिता में उन्होंने छठा स्थान हासिल किया।
इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्होंने खेलो इंडिया ट्राइब गेम्स के लिए क्वालीफाई किया और अब जगदलपुर में देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच 10वां स्थान प्राप्त कर एक नई उपलब्धि अपने नाम की है।
यह सफर इस बात का प्रमाण है कि सच्ची लगन और मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।
शासन-प्रशासन से सहयोग की अपील…
जिला अध्यक्ष राहुल सोलंकी ने शासन-प्रशासन और खेल विभाग से अपील करते हुए कहा कि महेश की कमजोर आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें,उचित खेल किट,
पोषणयुक्त डाइट, बेहतर प्रशिक्षण, और कोचिंग
आर्थिक सहायता जैसी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए।
साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में खेल मैदानों और खेल सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी की, ताकि प्रतिभाशाली खिलाड़ी संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से वंचित न रह जाएं।
देश के लिए मेडल जीतने का सपना..
महेश सापले ने अपनी सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि उनका सपना देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि उन्हें सही प्रशिक्षण, संसाधन और सुविधाएं मिलें, तो वे निश्चित ही अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।
उन्होंने कहा,
“मैं लगातार मेहनत कर रहा हूं और मेरा सपना है कि एक दिन देश के लिए गोल्ड मेडल जीतूं। अगर मुझे अच्छा ग्राउंड और कोचिंग मिले, तो मैं जरूर अपने क्षेत्र और देश का नाम रोशन करूंगा।”
यह कहानी केवल एक खिलाड़ी की सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। महेश सापले आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।
