बड़वानी में मुस्लिम समाज ने UCC विधेयक के विरोध में सौंपा ज्ञापन…..
राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर नायब तहसीलदार को ज्ञापन, मौलिक व धार्मिक अधिकारों के संरक्षण की मांग..
बड़वानी || ता. 19 अगस्त 2826 || (समीर शेख)-: समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 के विरोध में बुधवार दोपहर बड़वानी में मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में समाजजन कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम नायब तहसीलदार सोनू गोयल को ज्ञापन सौंपा। समाजजनों ने विधेयक को संविधान की मूल भावना के विपरीत बताते हुए नागरिकों के मौलिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि 21 जुलाई 2026 को विधानसभा से पारित किया गया यह विधेयक संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। समाजजनों ने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता को नीति निदेशक तत्वों में स्थान दिया गया है, जबकि मौलिक अधिकारों के तहत धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों को संरक्षण प्राप्त है। इस दौरान डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों का भी हवाला दिया गया।
विवाह और निकाह संबंधी प्रावधानों पर आपत्ति..
मुस्लिम समाज ने विधेयक में प्रस्तावित विभिन्न प्रावधानों पर आपत्ति जताई। ज्ञापन के अनुसार निकाह को केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित करना, विवाह का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य करना, फर्स्ट-कजिन विवाह पर प्रतिबंध तथा एक-विवाह की अनिवार्यता मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े प्रावधानों के विपरीत है।
समाजजनों ने बहुविवाह को शून्य घोषित करने और तलाक के लिए केवल न्यायालय की डिक्री को अनिवार्य किए जाने पर भी विरोध जताया। उनका कहना है कि इन प्रावधानों से पारंपरिक इस्लामी वैवाहिक व्यवस्था प्रभावित होगी।
उत्तराधिकार के नियमों पर भी जताई आपत्ति..
ज्ञापन में उत्तराधिकार संबंधी प्रावधानों पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई। समाजजनों का कहना है कि प्रस्तावित नियम मुस्लिम समुदाय के पारंपरिक उत्तराधिकार कानून से अलग हैं। वसीयत में इस्लामी कानून के तहत निर्धारित एक-तिहाई सीमा से संबंधित प्रावधानों में बदलाव को भी धार्मिक मान्यताओं में हस्तक्षेप बताया गया।
वहीं, अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग को विधेयक से छूट दिए जाने और अन्य समुदायों पर इसके प्रावधान लागू किए जाने को लेकर भी समाजजनों ने सवाल उठाए। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए समानता के अधिकार की भावना के विपरीत बताया।
अनुच्छेद 25, 26 और 29 के संरक्षण की मांग..
मुस्लिम समाज ने संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 के तहत प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता एवं सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि भारत की पहचान उसकी विविधता और अनेकता में एकता से है। ऐसे में किसी भी कानून के निर्माण में सभी समुदायों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए।
समाजजनों ने राष्ट्रपति से UCC विधेयक, 2026 के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने तथा संविधान प्रदत्त मौलिक, धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
