बड़वानी जिला पंचायत में हंगामा: अध्यक्ष, सदस्यों और सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर सरकार व अधिकारियों को घेरा..

बड़वानी || 05 अगस्त 2026 || (समीर शेख)-: जिला पंचायत बड़वानी की सामान्य सभा की बैठक बुधवार को उस समय विवादों में घिर गई, जब जिला पंचायत अध्यक्ष बलवंत सिंह पटेल एवं जिला पंचायत सदस्यों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा पूर्व में जारी आरोप-पत्र एवं कारण बताओ नोटिस का जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। जवाब नहीं मिलने से नाराज अध्यक्ष, सदस्यों तथा सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी ने बैठक का बहिष्कार कर दिया।

बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सीईओ जिला पंचायत को मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 तथा जिला पंचायत (कार्य) नियम, 1998 के कथित उल्लंघन, वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक स्वेच्छाचारिता, नियमों की अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा जैसे गंभीर मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में सात दिवस के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी कोई संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

इस दौरान सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी ने जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार और प्रशासन को घेरते हुए कहा कि केवल सेंधवा विधानसभा क्षेत्र में ही 160 स्कूल शिक्षकविहीन हैं तथा 470 विषयवार शिक्षकों के पद वर्षों से रिक्त पड़े हैं। उन्होंने कहा कि इससे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इस संबंध में सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग से जानकारी मांगी गई, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। अधिकारियों ने स्वयं स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में स्कूल बिना शिक्षकों के संचालित हो रहे हैं।

विधायक सोलंकी ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कई सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के पद रिक्त हैं, आवश्यक दवाइयों का अभाव है तथा ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को बेहतर उपचार के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्थिति इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है।

बैठक में आदिवासी छात्रावासों में अध्यक्षों की नियमविरुद्ध नियुक्तियों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि नियमानुसार छात्रावास अध्यक्ष का कार्यकाल अधिकतम तीन वर्ष होना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर एक ही व्यक्ति 15-15 वर्षों से अधिक समय से पद पर बना हुआ है। कई अध्यक्षों का मूल पद अन्य स्थानों पर होने के बावजूद उन्हें नियमों के विपरीत अटैच कर रखा गया है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों ने कहा कि बार-बार मांग करने के बावजूद जब आरोप-पत्र का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया तो जिला पंचायत अध्यक्ष बलवंत सिंह पटेल, सभी जिला पंचायत सदस्यों एवं सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी ने इसे जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की अवहेलना बताते हुए सामान्य सभा की बैठक का बहिष्कार करने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि अब केवल “जांच करवा देंगे” या “देख लेंगे” जैसे औपचारिक आश्वासन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। आरोप-पत्र का विधिसम्मत जवाब, निष्पक्ष जांच तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होने तक जनप्रतिनिधि अपने स्तर पर आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासी छात्रावासों, पंचायत प्रशासन तथा विकास कार्यों से जुड़े मामलों में तत्काल प्रभाव से ठोस कार्रवाई की मांग की।

बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि कुछ लोग मंचों और सोशल मीडिया पर विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति सरकारी बैठकों और जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देती है। यदि व्यवस्थाएं सही होतीं तो 160 स्कूल शिक्षकविहीन नहीं होते, 470 शिक्षकों के पद रिक्त नहीं रहते, अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी नहीं होती और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर इतने गंभीर सवाल खड़े नहीं होते। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल दावों और प्रचार से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले कार्यों और परिणामों के आधार पर निर्णय करेगी।

बैठक में जिला पंचायत सदस्य राजकला सोलंकी, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि राजू पटेल, जिला पंचायत सदस्य जामबाई रमेश सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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