प्राकृतिक खेती कार्यशाला संपन्न, वैज्ञानिकों ने मिट्टी के सूक्ष्मजीवों एवं बीज उपचार के महत्व पर दिया जोर…
बड़वानी, || 20 जून 2026 || {समीर शेख} -: विश्व पर्यावरण दिवस एवं अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मध्य आयोजित जनकल्याणकारी गतिविधियों के अंतर्गत ग्राम पंचायत दोंदवाड़ा में प्राकृतिक खेती विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन आत्मा, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला बड़वानी के निर्देशन में किया गया।
कार्यक्रम में लोकसभा सांसद गजेन्द्र सिंह पटेल, राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी, कलेक्टर जयति सिंह, पानसेमल विधायक श्याम बरड़े, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह सितोले, कृषि सखियों, बीआरसी प्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता की।

कार्यशाला में महाराष्ट्र के शाहदा से आईं कृषि वैज्ञानिक डॉ. मंजुला पाटिल ने प्राकृतिक खेती में मिट्टी के सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सूक्ष्मजीव मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने तथा फसलों के स्वस्थ विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही बेहतर अंकुरण एवं रोग नियंत्रण के लिए बीज उपचार की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम स्थल पर प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटकों बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, ह्यूमिक, नीमास्त्र एवं ब्रह्मास्त्र की प्रदर्शनी भी लगाई गई। किसानों ने खेती से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया।

लोकसभा सांसद गजेन्द्र सिंह पटेल ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि यह खेती लागत कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न उत्पादन में सहायक है। वहीं राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी ने मिट्टी की नियमित जांच कराने और रासायनिक दवाओं का न्यूनतम उपयोग करने की सलाह देते हुए किसानों को प्राकृतिक खेती की शपथ दिलाई।
पानसेमल विधायक श्याम बरड़े ने किसानों से स्वयं प्राकृतिक खेती अपनाने और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के खेतों का भ्रमण आयोजित करने पर भी जोर दिया।
कलेक्टर जयति सिंह ने किसानों को फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए एचडीपीएस (हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम) अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस पद्धति से कपास उत्पादन एवं किसानों की आय में वृद्धि संभव है। साथ ही किसानों को छोटे रेशे वाले कपास के स्थान पर मध्यम एवं लंबे रेशे वाले कपास की खेती अपनाने की सलाह दी, जिससे बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त हो सके।
उप संचालक कृषि ने किसानों को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की जानकारी देते हुए बताया कि योजना के तहत पंजीकृत किसानों को प्रति एकड़ 2 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती करने वाले खेतों का भ्रमण कर अनुभव प्राप्त करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती अपनाने वाले 10 किसानों को मध्यप्रदेश राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था, भोपाल द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जबकि उत्कृष्ट कार्य करने वाले 5 किसानों को श्रीफल एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मानित किसानों ने अपने अनुभव साझा कर अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को रसायन मुक्त, कम लागत एवं टिकाऊ कृषि पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। अंत में किसानों से प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने एवं अधिक से अधिक कृषकों को इससे जोड़ने का आह्वान किया गया।
